मंगलवार, 10 मार्च 2015

ज़िन्दगी सिखा ही देती है.……

आज पढ़ें मेरे अनुभव से जीवन पर लिखी एक कविता 

ज़िन्दगी सिखा ही देती है.…… 
पल पल गिरकर पल पल उठना, ठोकर खाकर फिर सम्भलना ,
ज़िन्दगी सिखा ही देती है....... 

गम भुलाकर खुशियाँ चुनना, रेत में से मोती का मिलना,
ज़िन्दगी सिखा ही देती है....... 

खुद के लिए खुद से लड़ना,विनम्रता से कैसे झुकना,
ज़िन्दगी सिखा ही देती है.......

खोकर फिर पाने की कोशिश करना,भावनाओं में बह जाने से बचना,
ज़िन्दगी सिखा ही देती है....... 

रोते रोते फिर लेना, हंस कर किसी के गम  मिटाना,
ज़िन्दगी सिखा ही देती है....... 

चुभते काँटों में से गुलाबों को चुनना, इस अग्निपथ पर कैसे चलना,

ज़िन्दगी सिखा ही देती है....... 

सुबह को उगकर शाम को ढलना, ढलकर  फिर उगते सूरज सा चढ़ना, 

ज़िन्दगी सिखा ही देती है....... 

अँधेरी राहों भी रोशनी को पाना, अकेले में खुद में खो जाना 

ज़िन्दगी सिखा ही देती है....... 

मरकर भी खुद को ज़िंदा रखना, किसी के आंसुओं को हँसी में बदलना,

ज़िन्दगी सिखा ही देती है....... 
आख़िरकार ज़िन्दगी सबकुछ  सिखा ही देती है.......  
"मैं भी  काफ़ी कुछ सीख ही गई।"
(स्वरचित) dj  कॉपीराईट © 1999 – 2015 Google


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