मंगलवार, 31 मार्च 2015

मेरे दादाजी (कविता)

मेरे दादाजी रौबीले और खुशमिजाज़ व्यक्तित्व के धनी थे। बागवानी के खूब शौकीन।ऐसा कोई पेड़ पौधा नहीं होगा जिसे उनके हाथों ने न सींचा हो। उनके साथ बीता वक़्त बहुत ही सुन्दर रहा। हम भाई बहनों में मुझ पर उनका विशेष प्रेम रहा। उनके रहते मुझे सुबह जल्दी उठने के लिए कभी अलार्म की जरूरत महसूस नहीं हुई।मुझे किसी भी समय उठना हो बस उन्हें बताने की देर रहती और ठीक उसी वक़्त उनकी आवाज सुबह मेरे कानों तक पहुँच ही जाया करती थी। उनका आवाज रुपी अलार्म कभी गलत नहीं हुआ। उनके साथ की यादें तो बहुत हैं, सभी शामिल न कर कर पाई मगर कुछ बातों के जिक्र के साथ, मेरे मन से निकले ये मोती आज इस कविता रूप में पिरोकर उन्हें सादर नमन के साथ समर्पित कर रही  हूँ । 

भूला बिसरा आज सब याद आ गया,
वो आपके साथ पेड़ से जाम तोड़ने वाला मुझे आज ख्वाब आ गया। 

ख्वाब में आप, मैं सभी थे 
पर वो जाम आम के पेड़ नहीं थे।  
आप घंटों साफ़ करते थे जो मैदान,
उसकी जगह बने थे अब कुछ मकान। 

न केले थे न जाम न आम,
न वो राखी, सुरजना, केरी के फूल 
क्या हम उन्हें पानी देना गए होंगे भूल?

कैसे भूलूँ मैं,
प्यार से आपका बार-बार मुझे आवाज़ लगाना, 
तब तो कभी-कभी चिढ़ ही जाती थी,
पर आज बड़ा याद आरहा है वो ज़माना।
   
आपके पैरों पर चढ़कर जब हम दोनों आपके पैर दबाते थे,
किसका पैर कौनसा है इस बात पे आपस में लड़ जाते थे। 
वो तेजाजी की कथा लगा आप हमें घंटों पास बिठाते थे,
आपकी आँखों में नींद न होती और हम सोने को तरस जाते थे।

वो समाचार लगा के आप झपकी लेते जाते थे, 
हमने चैनल बदला नहीं कि फ़ौरन आप उठ जाते थे।
आपका वो ठीक ३ बजे उठाना आज भी याद आता है,
जब भी पिछला याद करूँ तो मेरा मन भर आता है।
  
खूब लाडली थी आपकी मैं, मुझे हमेशा याद रहेगा ,
आपका वो प्यार दुलार दिल में सदा वैसा ही बना रहेगा। 
आपकी याद से आज ये मन दर्पण उजला हो गया,
आपके साथ बीता हर पल आज पलकों की कोरों को भिगो गया।

भूला बिसरा आज सब याद आ गया,
वो आपके साथ पेड़ से जाम तोड़ने वाला मुझे आज ख्वाब आ गया। 
(स्वरचित) dj  कॉपीराईट © 1999 – 2015 Google

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4 टिप्‍पणियां:

  1. Wah ji apne b hame hamare nana ji ki yad dila di ...miss you nanu.... and thanks divya ji...

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  2. धन्यवाद रचना जी आप हमारे लिए समय निकल ही लेतीं हैं। आभारी हूँ आपकी। :-))

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