शनिवार, 7 मार्च 2015

सुख चालाक है

आज  पढ़ें सरोज कुमार जी की लिखी कविता - "सुख चालाक है "
 मेरे  हृदय को स्पर्श करती है  इसलिए मेरी डायरी का हिस्सा है।  शायद आपको भी  पसंद आ जाए। dj

सुख  चालाक है,
दुःख बड़े काम की  चीज़ है।
दुःख न हो तो कोई  याद नहीं करेगा,
कोई प्रभु से फरियाद नहीं करेगा।

सुख चालक है, भटकाता है।
अपने पते पर कभी नहीं मिलता।

दुःख भोला-भाला है,
दूसरे के पते पर भी मिल जाया करता है।

दुःखी  बने रहो, कोई ईर्ष्या नहीं करेगा।
सुखी हो गए तो संसार नहीं सहेगा।

ज़िन्दगी को जहाँ छुओ घाव ही घाव हैं।
दुःख में ज़िन्दगी  स्थायी  भाव हैं।

दुःख अंतरंग है, सदा  संग-संग है,
 सुख तो है उच्छृंखल दुःख में  तमीज़ है।

दुःख बड़े काम की  चीज़ है. …… दुःख बड़े काम की  चीज़ है।
रचयिता -(सरोज कुमार) 
dj

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